covid 19(corona)

आजादी मिली थी 1947 में.

सुनी थी दादी से आज़ादी कि कहानी ,लोग डर -डर के जीते थे ये बात थी पुरानी |

न विकास था देश का न थी अच्छी तलवार ,

मार गिराते थे अंग्रेज लोगो को  कई- कई बार,

लड़ते रहे देश के वीर जवान ,हार न मानी पैदा हुई फिर झाँसी की रानी।

 वीर जवानो ने गंगा जैसे- खून बहाया 

तब जाकर भारत ने आज़ादी पाया। 

सुनी थी ये दादी से कहानी ,वीरो ने हार नहीं थी मानी। 

हम है आज़ादी के बाद के बच्चे ,बंदिश में रहना हमें नहीं लगते अच्छे। 

चल रही थी जिंदगी   मजे -मजे में फिर दिया कोरोना (कोविड 19 )ने दस्तक,

बच पा रहा था वही जिसकी थी इम्युनिटी सही। 

 फैलता था ये एक दूसरे को छूने से ,एक मीटर  की दुरी बनाओ, चाहते हो अगर जिंदगी  जीने को.

सब  तरफ हाहाकार मचा ,जो था ज्ञानी वो भी कोरोना के आगे झुका। 

छीन गई बाहर जाने की आज़ादी* 

सब तरफ होने लगी बर्बादी। 

 बंद था सब फिर भी हो रहा था शोर *

जानवर भी सोच रहा थे इंसान कहा छुपा "जैसे -छुपे चोर। 

चपेट में आ रहे थे सब इसके ,

दहशत फ़ैल रही थी चारो ओर ,

घर में   बैठकर लोग हो रहे थे फिर भी बोर। . 

बाहर पुलिस ,डॉक्टर ,सफाई कर्मी ,जान पे खेलकर दे रहे थे अपना सहयोग

दादी की कहानी वो बहत याद आने लगे*

खुद को कैद जब घरो में पाने लगे। 

चांदी, सोना,हिरा ,मोती न आ रहे थे काम ,

बंद था मस्जिद बंद था मंदिर भजन ,

काम आ  रहा था बस सादा भोजन। 

बढ़ता ही जा रहा था देश बंद ( lockdown  ) 

पूरा विश्व सोच रहा था कब होगा ये सिलसिला ख़तम। 

पशु, पक्षी और इंसान थे बेचारे सब लाचार ,

होती थी कई -कई बार कोरोना मेडिसिन पे विचार ,

विफल हो जाता था मिशन हर बार। 

उम्मीद में बैठा है पूरा संसार ,

होगा कोरोना का एक दिन अंत काल। 


जय हिन्द 








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